Wednesday, August 31, 2016

Prayer

हे मेरे स्वामी ! हे सतगुरु ! अपने पाँचों नियमों में मुझे दृढ करो ! ऐसी बख्शिश मुझ पर करो कि आपने अगर ये मानुष-तन दिया है तो इस तन को सफल करने के लिए करुणा करो ! दया करो ! ताकि मेरा ये मानुष-जन्म सफल हो जाए ! मैं जब भी आरती करूँ तो मेरा मन पूरी तरह आरती में एकाग्र हो और इधर-उधर भटके ! हे सतगुरु ! आपकी किरपा से ही ये संभव है, आपकी दया से ही मेरा मन काबू में सकता है इसलिए आप किरपा करो कि मेरा मन भटके ! मेरा मन आपके ही, आप ही का कारज करते हुए, आप ही की लीलाओं का चिंतन करे ! एक-एक शब्द पर ध्यान देता हुआ आप ही को याद करे, आप ही का स्मरण करे ! ऐसी मेरे मन की हवस बना दो ! हे मेरे स्वामी ! ऐसी दया करो कि मैं आपको विसरुं आप मुझे विसरो ! ऐसी करुणा मुझ पर सदा बनाए रखना !
आनंदमय भगवन! मुझे प्रसन्ता दो। मधुरमय प्रभु! मुझे मधुर वाणी दो। परम पावन परमात्मा ! मुझे ह्रदय की पवित्रता दो।।
जय हो मेरे मालिक मेरे स्वामी जय हो सदा ही जय होवे आपकी

सभी गुरु के सच्चे प्रेमियों को प्रेमभरी जय सच्चिदानन्द जी