हमारा जीवन कर्म पर आधारित है । जीवन में आने वाली परिस्थितियाँ अपने पूर्व कर्मों का ही फल हैं । इसलिए जीवन को सुधारना है तो सबसे पहले कर्मों को सुधारना होगा और कर्मों को सुधारने के लिए मन को बदलना या परिवर्तित करना पड़ता है । केवल बुद्धि के आधार पर यह सम्भव नहीं है। यह हम सभी जानते हैं कि क्रोध नहीं करना चाहिए , ईर्ष्या , द्वेष नहीं करना चाहिए फिर भी कर्म करते समय हम चूक जाते हैं क्योंकि हमारा मन क़ाबू मैं नहीं रहता है और वह हमें कभी कभी गुमराह कर देता है। इसीलिए इस परिवर्तनशील मन मैं परिवर्तन लाना आवश्यक है । इसके लिये हमें मन की गहराई में जाना चाहिये
जय गुरुदेव।
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